उत्तरकाशी : इन दिनों देश-दुनिया में उत्तराखंड के उत्तरकाशी ज़िले में स्थित धराली में आई भीषण आपदा की चर्चा है। भौगोलिक और प्राकृतिक प्रयोगों से जुड़े बड़े-बड़े संस्थान इस आपदा पर शोध कर रहे हैं। हर कोई जानना चाहता है कि कैसे एक बसा-बसाया शहर महज 30 से 35 सेकंड के अंदर प्राकृतिक आपदा में तबाह हो गया।
इसरो (भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन) ने एनआरएससी (राष्ट्रीय सुदूर संवेदन केंद्र) द्वारा ली गई धराली की दो तस्वीरें जारी की हैं। पहली तस्वीर 13 जून 2024 की है। दूसरी तस्वीर 7 जुलाई 2025 की है, जो आपदा के तीसरे दिन ली गई थी। आइए आपको बताते हैं कि इन तस्वीरों में क्या दिख रहा है।
इसरो द्वारा अपनी वेबसाइट पर पिछले साल 13 जून को ली गई इन तस्वीरों में खीर गंगा नदी के सामने और उसके आसपास तथा भागीरथी के किनारे बसे धराली गाँव और उसके बाज़ार की तस्वीरें दिखाई दे रही हैं। खीर गंगा के प्रवाह क्षेत्र में, जब यह पहाड़ी से उतरकर मैदानी इलाकों में प्रवेश करती है, तो उसके ठीक सामने होटल, घर और बड़े-बड़े पेड़-पौधे दिखाई देते हैं। कुल मिलाकर, एक पहाड़ी कस्बे की बसावट दिखाई देती है।
इसरो ने 7 अगस्त को जारी की धराली की दूसरी तस्वीर: इसरो द्वारा जारी की गई दूसरी तस्वीर 5 अगस्त को उत्तरकाशी धराली में आई आपदा के बाद 7 अगस्त, 2025 की है। इस तस्वीर में धराली में खीरगंगा नदी के सामने और आसपास का इलाका पूरी तरह बह गया है। वहाँ केवल एक मैदान दिखाई दे रहा है जिस पर मलबा जमा है। खीरगंगा से हुई तबाही और उसके साथ आए मलबे की मात्रा ने भागीरथी की लय और गति को भी बाधित कर दिया है।
7 अगस्त की तस्वीर में साफ दिख रहा है कि खीरगंगा की बाढ़ ने भागीरथी नदी के प्रवाह क्षेत्र को भी संकरा कर दिया है। भागीरथी नदी का आधे से ज़्यादा हिस्सा मलबे से ढका हुआ दिखाई दे रहा है। इस मलबे के कारण भागीरथी एक संकरे रास्ते से बह रही है। खीरगंगा, जो कभी पहाड़ से उतरकर दाहिनी ओर बहती थी, ने सामने की बस्ती को उजाड़कर सीधा रास्ता बना लिया है। इससे पता चलता है कि खीरगंगा की आपदा ने धराली के भूगोल को पूरी तरह बदल दिया है। न सिर्फ़ धराली का भूगोल बदला है, बल्कि भागीरथी जैसी कहीं बड़ी नदी का प्रवाह पथ भी अस्त-व्यस्त हो गया है।

